प्रतिष्ठित साहित्यकार कुर्रतुल एन हैदर का निधन
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–>नई दिल्ली. ज्ञानपीठ पुरस्कार और पद्मभूषण से सम्मानित उर्दू की प्रतिष्ठित साहित्यकार कुर्रतुल एन हैदर का लंबी बीमारी के चलते मंगलवार को निधन हो गया।
परिवार की सदस्य हुमां हैदर हसन ने बताया कि लगभग 80 वर्षीय हैदर का इलाज नौएडा के कैलाश अस्पताल में चल रहा था। हैदर फेफड़े के किसी रोग से पीड़ित थीं लेकिन जानकारी के मुताबिक उनकी मृत्यु निमोनिया के कारण हुई। हैदर को आज दोपहर ही सुपुर्द ए खाक किया गया। कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हैदर ने आग का दरिया और आखिर ए शब के हमसफर जैसी मशहूर और महत्वपूर्ण कृतियां साहित्य जगत को दीं।
साहित्य जगत के साथ ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी ऐनी आपा के नाम से मशहूर हैदर के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। नीतीश ने कहा कि युवा पीढ़ी के साहित्यकारों को हैदर के साहित्य और आदर्शो से बहुत कुछ सीखना चाहिए।
सम्मान और कृतियां : 1927 में अलीगढ़ में जन्मीं हैदर को 1985 में पद्मश्री, 1989 में ज्ञानपीठ पुरस्कार और 2005 में पद्मभूषण से नवाजा गया। हैदर की लघुकथाओं, कहानियों और उपन्यासों में भारत विभाजन का दर्द साफ नजर आता है। वे विभाजन के समय पाकिस्तान चली गई थीं लेकिन वहां उन्हें चैन नहीं मिला और वे इंग्लैंड जाकर वापस भारत लौट आईं। आग का दरिया, आखिर ए शब के हमसफर, सफीन ए गमे दिल, गर्दिशे रंगे चमन, चांदनी बेगम और मेरे भी सनमखाने उनके मशहूर ओ मारूफ उपन्यास हैं। सितारों से आगे, शीशे के घर और पतझड़ की आवाज उनके कहानी संकलन हैं। अन्य कृतियों में कारे जहां दराज, चाय के बाग, छुटे असी तो बदला हुआ जमाना था और सितंबर का चांद प्रमुख हैं।
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