भारत के शर्मा फहरा रहे लंदन में परचम
कहानीकार तेजेन्द्र शर्मा का मानना है कि हिन्दी साहित्य पर बाकायदा वामपंथी तानाशाही चल रही है और जो विरोध करते हैं उन्हें मान्यता नहीं देने दी जाती।भारतीय मूल के,अब लंदन में बसे तेंजेन्द्र,दोदिनी प्रवास भोपाल आए तो ‘सिटी भास्कर ‘ से बातचीत में उन्होंने कहा कि हिन्दी साहित्य जब से वामपंथ के हाथों में गया,तब से इसके सारे रस गायब हो गए और एक ही रस रह गया-.आक्रोश का।शर्मा को इस बात पर हैरानी है कि नई पीढ़ी के लेखन पर चार पीढ़ी के लोग तय कर रहे हैं.क्या अच्छा है-.क्या बुरा है। और तो और कहानी को कविता के मापदण्डों पर परख रहे है।इसलिए वह कहते हैं,’साहित्य में वामपंथ की तानाशाही चल रही है।‘अपने लेखन के विषयों पर चर्चा में वह कहते हैं,मैंने दुनिया देखी है इसलिए आम हिन्दी की सोच मेरे लेखन में शामिल होती है।मसलन,जब बावरी ढांचा यहाँ ढहता है ,तो उसका रिएक्शन सउदी अरेबिया में क्या होगा,मैं उस पर कहानी ‘ चरमाराहट ‘ लिखता हूँ। हिंदी की हालत पर शर्मा कहते हैं,सरकार नहीं चाहती कि,यह राजभाषा से राष्टभाषा बने।वह यह भी कहते हैं कि सरकार को हाउस अाफ कामन्स में प्रतीक के तौर पर हिंदी सुनाने के लिए करोड़ों रूपए खर्च करने पड़े,जबकि वे हाउस अाफ लाडर्स में बीते 13 सालों से वे इस को बिना सरकारी सहायता करते आ रहे हैं।हिंदी बोलने वालों को भारत में ही हिकारत से देखा जाता है,विदेश में नहीं।सीरियल ‘शांति‘ के कुछ एपिसोड के लिए भी लेखन कर चुके शर्मा के लेखन का प्रिय मूड टेजेडी है।उनका तर्क है,कि जीतने वाले के साथ जमाना होता है,मैं हारे हुए व्यक्ति के साथ खुद को खड़ा पाने में अच्छा महसूस करता हूँ।तेजेन्द्र ने 1995 में 40 साल से कम उम्र के कथाकारों के लिए अंतरराष्टीय इंदु शर्मा कथा सम्मान की स्थापना की है।