साहित्यिक गतिविधियों की जानकारी

नवम्बर 2007 में मेरा किसी निजी कार्य से नई दिल्ली जाना हुआ।साहित्यिक गतिविधियों की जानकारी हासिल करना मेरी व्यक्तिगत रूचि हो सकती है किन्तु इस रूचि को नितान्त व्यक्तिगत कहूँ तो उचित नहीं होगा। हिन्दी साहित्य को लेकर नई दिल्ली के स्थानिय पत्र मे साहित्य के बुढ़ाने पर तकरीबन एक चौथाई पृष्ठ का आलेख पढ़ने को मिला।चौकानेवाली बात यह है कि दिल्ली के उक्त लेखक ने केवल दिल्ली प्रदेश के लेखकों को लेकर बात कहीं और यह कहा कि संभवतः अब सारे हिन्दी के लेखक बुढ़ा गए है।कुछ के नाम भी उक्त लेखक महोदय ने गिनाए।मुझे ऐसा लगता है कि वे शायद यह भूल गए कि दिल्ली के बाहर भी लेखकों की अच्छी खासी ज़मात है जिसे उन्होंने अंकित नहीं किया क्यों नहीं किया,यह तो मैं नहीं जानता ,हाँ इतना अवश्य कह सकता हूँ कि संभवतः वे यह सोचते हैं कि दिल्ली के बाहर कोई लेखक है ही नहीं।अपने क्षेत्र से बाहर किसी लेखक का होना बहुत बड़ी पीड़ादायक  बात होगी ही यह पीड़ादायक बात कह जाना केवल दिल्ली के लेखक तक ही सीमित नहीं है बल्कि दिल्ली के बाहर अन्य राज्यों या शहरों के लेखकों में भी यह बीमारी है। ये सारे लेखक यह समझते हैं कि उनके आसपास जो लेखक है उनके अलावा कोई लेखक ही नहीं है। यह भी तुर्रे की बात है कि अपने खेमे से बाहर किसी लेखक का अस्तित्व कोई स्वीकारने के लिए तैयार ही नहीं है।

    भोपाल में स्वराज भवन मेंनिरन्तरपाठ के अवसर पर मात्र बीस बाईस कवि लेखक उपस्थित थे।दिग्गजों में हंसी मजाक चल रहा था कि     भोपाल में कितने कवि और लेखक है। हमारे एक प्रतिष्ठित कवि लेखक महोदय ने तपाक से कह दिया , इस समय यहाँ जितने कवि और लेखक आपको दिखाई दे रहे हैं इनके अलवा भोपाल में और कोई कवि लेख नहीं है। अब देखिए तो यह मानसिकता,यह मानसिकता किसी एक खेमें की नहीं है अपितु सभी खेमें में एड्स की बीमारी की तरह व्याप्त है। अब इसे क्या कहा जा सकता है।

किसी कवि या लेखक की मुलाकात अन्य कवि या लेखक से हो जाने पर यह देखा गया है कि वे एक दूसरे को नया लेखक या कवि कहने में कोई संकोच नहीं करते।वे बड़ी आसानी से कह देते है कि नये कवि या नये लेखक है.मैंने तो यहाँ तक देखा है कि कोई व्यक्ति अभी अभी लिखने लगा है किन्तु किसी अपरिचित से मुलाकात पर अपरिचत व्यक्ति को नया लेखक कहने में ज़रा भी कोफ्त महसूस नहीं करता।यह मानसिकता उचित नहीं है। झट् से किसी को भी नया कवि या लेखक कहना एक तरह से छोड़ देना चाहिए ।

Published in: on November 19, 2007 at 3:28 pm Comments (0)