कवि त्रिलोचन का देहावसान

रविवार दिनांक 9 दिसम्‍बर 2007 को इस सदी के महान कवि ,कवि त्रिलोचन शास्‍त्री का देहावासन हो गया है।वे 91 वर्ष की आयु के थे।पिछले कई दिनों से अस्‍वस्‍थ्‍य थे।

  कवि त्रिलोचन का जाना साहित्‍य की सशक्‍त विधा कविता के एक स्‍वर्णिम युग के अवसान के समान है।असाधारण प्रतिभा के धनि और सिद्धान्‍तों पर अडिग रहनेवाले अनेक भाषाओं के महारथी साहित्‍य के इस महानायक को अबूझ नेपथ्‍य में चले जाने से साहित्‍य जगत को शोकग्रस्‍त कर दिया ।

      आलोचक और कवि रमेशचन्‍द्र शाह ने त्रिलोचन जी के अवसान को साहित्‍य की गंभीर क्षति बताया और कहा कि हिन्‍दी कविता में त्रिलोचन सानेट के एकमात्र प्रतिनिधि कवि थे।उनका इस तरह अचानक जाना बेहद दुख भरा क्षण है।जानेमाने आलोचक विजयबहादुर ने कहा कि प्रगतिशील कविता की त्रयी अब ढह गई है। इस त्रयी में नागार्जुन,केदारनाथ अग्रवाल और त्रिलोचन का नाम लिया जा सकता है।  

    कवि त्रिलोचन शास्‍त्री को ” चौपाल ” की ओर से भावभिनी श्रद्धांजलि अर्पित —- शंकर सोनाने ,सम्‍पादक,चौपाल

Published in: on December 10, 2007 at 5:22 pm

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