हिन्दी खुलेपन और स्वतंत्रता की भाषा- पंत
हिन्दी खुलेपन और स्वतंत्रता की भाष है,यह विचार गुरूवार दिनांक- 10 जनवरी 2008 को विश्व हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य हिन्दी विषय पर आयोजित विशेष संगोष्ठी के अवसर पर प्रसिद्ध साहित्यकार कैलाशचन्द्र पंत ने व्यक्त किए।इस अवसर पर भगवत रावत,राजश्री रावत और अन्य साहित्यकार उपस्थित थे।श्री पंत ने कहा कि विज्ञापन तो हिन्दी में बडे बडे अक्षरों में लिखे जाते हैं,जबकि उन पर चेतावनी अत्यन्त छोटे अक्षरों में अंग्रेजी में लिखी जाती है,जिससे यह स्पष्ट होता है कि हिन्दी स्वतंत्रता और खुलेपन की भाषा है,वहीं अंग्रेजी छिपाव भी भाषा है। भगवत रावत ने कहा कि हिन्दी नदी के समान प्रवाहमान भाषा है जो उपर से नीचे की ओर प्रवाहित होती है और प्रवाह क्रम में जो भी मिले उसे साथ ले चलती है।
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