दुष्‍यन्‍त कुमार स्‍मारक पाण्‍डुलिपि संग्रहालय

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दुष्‍यन्‍त कुमार स्‍मारक पाण्‍डुलिपि संग्रहालय व्‍दारा आयोजित दो दिवसीय प्रतिष्‍ठा समारोह में भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में संग्रहालय व्‍दारा साहित्‍य की तीन विभूतियों को इस वर्ष 2008 में एक गरिमामय कार्यक्रम में सम्‍मानित किया गया है। मध्‍यप्रदेश के  राज्‍यपाल महामहिम राज्‍यपाल डा बलराम जाखड के मुख्‍य आतित्‍थ्‍य में यह कार्यक्रम सम्‍पन्‍न हुआ है। चौपाल परिवार तीनों साहित्‍यकारों का हार्दिक अभिनन्‍दन करता है।

निदा फाजली

12 अक्‍टूबर 1938 को दिल्‍ली में जन्‍में निदा फाजली ने स्‍नातकोत्‍तर शिक्षा 1954 में ग्‍वालियर से पूरी की । सर्वाधिक चर्चित शायरों एवं गीतकारों में माने जाते हैं। 1980 में पहली फिल्‍म  आप तो ऐसे न थे  में गीत लेखन शुरू करने के बाद अब तक निरन्‍तर गीत लिख रहे हैं। 24 से अधिक पुस्‍तकों के रचनाकार श्री निदा फाजली को साहित्‍य अकादमी सम्‍मान,खुसरो अवार्ड,मीर तकी मीर पुरस्‍कार सहित अनेक सम्‍मान प्राप्‍त हो चुके हैं। दुष्‍यन्‍त कुमार स्‍मारक पाण्‍डुलिपि संग्रहालय व्‍दारा उन्‍हें दुष्‍यन्‍त अलंकरण से सम्‍मानित किया गया है।

 प्रेम शंकर रघुवंशी

8 जनवरी 1936 को होशंगाबाद जिले के सिवनी मालवा तहसील के गॉंव जमानी बैगनिया में जन्‍म हुआ है। एक दर्जन से अधिक पुस्‍तकें प्रकाशित हो चुकी है। वर्तमान में वे सेवानिव़त्‍त है। उन्‍हे सुदीर्घ साधना सम्‍मान से दुष्‍यन्‍त कुमार स्‍मरक पाण्‍डुलिपि संग्रहालय व्‍दारा सम्‍मानित किया गया है।

लक्ष्‍मण मस्‍तूरिया

7 जून 1949 में में जन्‍मे लक्ष्‍मण मस्‍तूरिया की अब तक आधा दर्जन पुस्‍तकें हिन्‍दी और छत्‍तीसगढी मे प्रकाशित हो चुकी है। उन्‍हें आंचलिक रचनाकार सम्‍मान से दुष्‍यन्‍त कुमार स्‍मारक पाण्‍डुलिपि संग्रहालय व्‍दारा सम्‍मानित किया गया है।

फोटो एलबम  के लिए नीचे दिए पते पर क्लिक करें  http://drshankarsonane.picsquare.com/album/Default%

Published in: on March 4, 2008 at 4:12 pm

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