नव संवत्‍सर

 

ॐ सूर्याय नम: ( नव संवत्‍सर : वर्ष प्रतिपदा :चन्‍द्र छन्‍द)                 

                  – राम मेश्राम,एफ-115/29 शिवाजी नगर, भोपाल मप्र

मैं अंधेरा हूँ  रोशनी भर दे

दिल की श्‍याही को चॉंदनी कर दे

लिजलिजापन निकाल ने मेरा

मेरी रग रग में सनसनी भर दे  

2

जैसे सोती हुई सुबह हिल जाए

जैसे तालाब में कमल खिल जाए

जैसे पुरवा का कहकहा न रूके

जैसे मुरदे को जिन्‍दगी मिल जाए

 3

बॉंस की फॉंस-फॉंस हँसती है

नीम की सॉंस-सॉंस हँसती है

आम जब राम-राम करता है

मौत भी बदहवास हँसती है

  4

सुर्ख फूलों में ताजगी मेरी

शाम-सुबहों में रागिनी मेरी

योग का मुझमें खिलखिलाएं कमल

सूर्य जैसी हो जिन्‍दगी मेरी

  5

ज्‍योति का एहतराम करता हूँ

मैं उषा का कलाम कहता हूँ

हर सुबह हो नया जनम मेरा

सूर्य को मैं सलाम करता हूँ

 6

नूर रौशन तलाश हो जाए

**जाफरानी पलाश हो जाए

ले *सरापा सलाम सूर्य मेरा

मेरा जीवन , प्रकाश हो जाए

* * केशरिया रंग

* आपातमस्‍तक

 गजल

किसी पुण्‍य  का फल जमी पर लगा है

उसी के सबब यह नया दिन उगा है

नए चैत केसरिया-बालम की खातिर

सरे-राह केसरिया टेसू सजा है

अलस्‍सुबह कोयल से सुनकर तराने

हरी शाख का आम गदरा गया है

मिला अर्ध्‍य श्रद्धा के जल का कि सूरज

सुबह नर्मदा में नहा कर उठा है

कनेरी-घनेरी घटा में ठठा कर

समूचा बसन्‍त शहर हँस पडा है

कोई रात शीतल कोई दिल गरम है

कि नौरस है चौरस ये क्‍या माजरा है

अरे क्‍यों रे सेमल , न हो रोज पागल

अगर चैत में तू जो दूल्‍हा बना है

नई फुनगियों के हरे ताज पहने

दरख्‍तों ने मुझको नमस्‍ते कहा है

मैं हूँ धूल का मुक्‍त झोंका कि मेरा

हवा संग उडने का मन कर रहा है

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 राम मेश्राम   व्‍यक्तिगत विवरण

0 जल्‍म : 20 दिसम्‍बर 1946 वारासिवनी (मध्‍यप्रदेश)

0 सागर विश्‍वविद्यालय  से प्राचीन भारतीय इतिहास ,संस्‍क़ति एवं पुरातत्‍व में 1970 में  एम ए । भोपाल विश्‍वविद्यालय से एल एल बी

0 मध्‍यप्रदेश प्रशासनिक सेवा के कई पदों पर कार्य । 31 दिसम्‍बर  2006 को सेवा निव़ृत्‍त   पश्‍चात पूर्वकालिक साहित्‍य ,कला ,संस्‍कृति विषयक अध्‍ययन , लेखन ,आयोजन आदि

0 गजल संकलन : शोलों के फूल (जनवरी 2006 में) मेघा बुक्‍स से प्रकाशित । जिस पर 11 वॉं दिव्‍य पुरस्‍कार 2007 में0 देश की अनेक प्रतिष्ठित पत्र : पत्रिकाओं में आधुनिक चिन्‍तन एवं भाव बोध परक गजलों   का लगातार प्रकाशन

0 हिन्‍दुस्‍तानी शास्‍त्रीय संगीत पर 300 से अधिक समीक्षा आलेख पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित

0 इन दिनों मध्‍यप्रदेश का शास्‍त्रीय संगीत  ( प्रागैतिहासिक काल से आज तक )के लेखन में व्‍यस्‍त ।

 

Published in: on April 6, 2008 at 5:04 pm

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