भारत भवन न्यास भंग
अन्तत: दिनांक 22 अप्रैल 2008 को भारत भवन न्यास भंग कर दिया गया । इसी के साथ नया न्यास बनाने का रास्ता भी निकल आया । जैसा कि ज्ञात ही है कि न्यास के अध्यक्ष और सदस्यों के नाम को लेकर काफी लम्बे समय से खींचातानी चल रही थी । शीघ्र ही नवीन न्यास के गठन की उम्मीद की जा रही है । नवीन न्यास में जानेमाने कलाकार ,साहित्यकार और अन्य गणमान्य लोग हो सकते है । न्यास के भंग होते ही बीते समय का विवाद स्वमेव समाप्त हो गया । हेमामालिनी और सन्न्ी गौर को इसलिए हटाया गया कि वे न्यास की किसी भी बैठक में उपस्थित नहीं हुए ।
दरअसल भारत भवन के न्यास के भंग होने के पीछे कई लुके छुपे कारण हो सकते हैं । जो कहा जा रहा है वह तो मात्र एक संभावना हो सकती है किन्तु यदि खेमेबाजी को ध्यान में रखा जाए तो स्पष्ट होता है कि दूसरे खेमे के लोग इस खेमे के लोगो को पसन्द नहीं करते थे । छिंटाकसी चलती रहती थी । सूत्रों के मुताबित देखा जाय तो एक खेमे के विचारों के सदस्य दूसरे खेमे के विचारों से बिल्कुल भी सहमत नहीं होते थे । यह असहमति का दौर तब तक चलता रहेगा जब तक कि वर्चस्ववादी खेमा अपनी पताका न फहरा लें । यह भी सत्य है कि यदि नवीन खेमे में वर्चस्वादियों को शामिल नहीं किया गया तो आगे चलकर दूसरी बार भारत भवन न्यास भंग होने की संभावना है । इससे बचने के लिए सरकार को खेमेवादियों तथा वर्चस्ववादियों से सलाह लेना उचित होगा । यदि हो सके तो गठबन्धन के रूप में या मिलीजुली सरकार के समान खेमेवादियों तथा वर्चस्ववादियों को मिलाकर नवीन न्यास किया जाना भारत भवन के भविष्य के लिए एकदम सही होगा । देखें , आगे आगे होता है क्या ।
कृष्णशंकर सोनाने
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