अभी हाल ही में मेरी नई पुस्तक ” आदिवासी लोककथाएं ” प्रकाशित होकर आई है। इस पुस्तक में आदिम जनजाति समुदाय की मिथक कथाएं है। ये कथाए आदिम जनजाति समुदाय में वाचिक परम्परा के अन्तर्गत व्याप्त है ,जिन्हें संभवत: अब तक लिपिबद्ध नहीं किया गया था । मुझे लगा कि इन कथाओं की खोज की जाकर इन्हें एक स्थान पर एकत्र की जाए । इन बिखरी हुई मिथक कथाओं को सिलसिलेवार लिपिबिद्ध किया गया है। ये कथाएं रिगवेद की स्मरण दिलाती है। इसका कारण यह हो सकता है कि जनजाति समुदाय आदि समय से सूर्य,चन्द्रमा,अग्नि,जल,वायु आकाश,पेड पौधे इसी तरह वे पूजा किया करते थे और आज भी कर रहे है।
प्रकाशक ,अखिल भारती 3014,चर्खेवालान,दिल्ली-110006
कृष्णशंकर

रवि भाई,
आपको धन्यवाद ा
मैं अक्सर आपका ब्लाक पढ्ते रहता हूं ा आप कभी भोपाल आएं तो दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय अवश्य आएं ा इस संग्रहालय में आपको साहित्यकारों की हस्तलिखित पाण्डुलिपियां देखने को मिलेगी ा इतना ही नहीं और बहुत कुछ देखने को मिलेगा ा सादर
आपका अपना
कृष्णशंकर सोनाने