डा;शफीका फरहत का इन्‍तकाल

latest-mp3-034.jpg डा;शफीका फरहत हमको तन्‍हा कर गई। गत दिनों जानी मानी शायरा का इन्‍तकाल हो गया । मध्‍यप्रदेश उर्दू अकादमी व्‍दारा उन्‍हें अश्रुपूरित श्रृद्धांजलि दी गईद्। मप्र उर्दू साहित्‍य अकादमी के अध्‍यक्ष डा बशीर बद्र ने कहा कि ‘उनकी याद में मेरे आंसू जमीं पर नीहं मरे दिल में उतर रहे हैं,यह मेरा निजी दुख है।

Published in: on January 9, 2008 at 3:17 am Comments (0)

शंकर सोनाने–एक परिचय

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शंकर सोनाने जन्म 19 अप्रैल 1952 नेपानगर मप्र शिक्षा एचएससी,आयुर्वेदरत्न,एमआईएच होम्यो,पटकथालेखन प्रकाशन 1.वेदना.प्रबंधा काव्य 2.कोरी किताब.काव्य संकलन 3.संवेदना के स्वर.काव्य संकलन 4.बौराया मन. काव्य संकलन 5.मेरे तो गिरधर गोपाल.कृष्णकाव्य संकलन 6.दो शब्दों के बीच.कविता संकलन 7.किशोरीलाल की आत्महत्या.दलित काव्य संकलन 8.निर्वासिता.कविता एक औरत कविता संकलन 9.धूप में चाँदनी..ग़ज़ल संग्रह 10.गौरी..उपन्यास 11.क्रोध..बाल कहानियाँ 12.कुदरत का न्याय ..बाल कहानियाँ 13.आदिवासी मिथक कथाएं..प्रेस में 14.केक्टस के फूल..उपन्यास..प्रेस में 15–समकालीन पटकथा 16–मुटठी भर पैसे-उपन्‍यास
Published in: on January 2, 2008 at 4:25 pm Comments (0)

साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार

हिन्‍दी के वयोव़द्ध लेखक अमरकान्‍त,प्रसिद्ध उर्दू आलोचक वाहाब अशर्फी और राजस्‍थानी समालोचक कुन्‍दनमाली सहित विभिन्‍न भाषाओं के 23 लेखकों को वर्ष 2007 का साहित्यिक अकादमी पुरस्‍कार दिए जाने की घोषणा की गई है।

                             पुरस्‍कृत लेखकों की सूची

भाषा           शीर्षक  विधा                                            लेखक

हिन्‍दी         इन्‍ही हथियारों से-उपन्‍यास                 अमरकान्‍त

गुजराती    गजल संहिता -कविता संग्रह             राजेन्‍द्र शुक्‍ल

पंजाबी       कमण्‍डल - कविता संग्रह                   जसवन्‍त दीद

राजस्‍थानी   आलोचना री आंख सूं-समालोचना   कुन्‍दनमाली

संस्‍क़त        लसल्लितिका-कविता संग्रह             हरिदत्‍त शर्मा

उर्दू               तारीख ए अदब ए उर्दु -समालोचन    वहाब अशर्फी

सिन्‍धी         विंजू वसां आयूं-नाटक संग्रह             वासुदेव निर्मल

Published in: on December 27, 2007 at 3:26 am Comments (0)

साहित्यिक पत्रिका ‘ अक्षरा ‘ के प्रकाशन के 25साल

latest-mp3-018.jpgसाहित्यिक पत्रिका ‘ अक्षरा ‘ के प्रकाशन के 25साल पूरे होने के मौके पर मंगलवार दिनांक 25  दिसम्‍बर 2007 को राष्‍टभाषा प्रचार समिति भोपाल हिन्‍दी भवन व्‍दारा  एक समारोह आयोजित किया गया । हिन्‍दी भवन भोपाल में यह आयोजन बडी तादाद में उ‍पस्थित साहित्‍यकारों, हिन्‍दी प्रेमियों की उपस्थिति में सम्‍पन्‍न हुआ।

Published in: on at 3:15 am Comments (0)

बाल कल्‍याण एवं बाल साहित्‍य शोध केन्‍द्र

latest-mp3-017.jpgबाल कल्‍याण एवं बाल साहित्‍य शोध केन्‍द्र

बाल मन को जीता एक छोटा बच्‍चा

संस्‍कारधानी भोपाल में बाल कल्‍याण एवं बाल साहित्‍य साहित्‍य शोध केन्‍द्र की स्‍थापना होनी ही थी।भाई महेश सक्‍सेना जिस दिन सेवा निव़त्‍त हुए,उसी दिन उनके मन के भीतर गहरे बैठा छोटा बच्‍चा इस तरह खिलखिलाकर हंसा मानो कह रहा हो- बहुत सालों बाद अब आएगा मजा।तटबंधों पर सागर की हिलोरें गहरे निशान छोड जाती है,ऐसे ही सागर की हिलोरों जैसे स्‍थायी निशान महेश भाई के बाल मन में आज तक उनकी बाल स्‍म़तियों के जीवन्‍त है।किसी बच्‍चे के रोने की आवाज जिस व्‍यक्ति की आंखें गिली और मन को विचलित करती हो,किसी बच्‍चे की कविता की एक एक पंक्ति पर जिस व्‍यक्ति का मन न्‍यौछावर हो जाता हो,किसी बिखरे को अपने माता पिता से मिलाने की श्रमसाध्‍य प्रक्रिया के बाद जो व्‍यक्ति सुकून की नींद सोता हो,जो व्‍यक्ति हर क्षण सिर्फ और सिर्फ बच्‍चों को जीता हो,उनकी खुशी में खुश,उनके दुख में दुखी हो उठता हो,वह व्‍यक्ति एक छोटा बच्‍चा ही हो सकता है।  

   एक कमरा,बाल साहित्‍य केन्‍द्र के लिए छोटा होगा,अत नीचे के घर  का एक बडा हिस्‍सा इस विशेष उददेश्‍य के लिए खाली करवाया गया,बच्‍चों को रूचि और उम्र की द़ष्टि से फरनीचर बनवाया गया,न जाने कहां कहां चिटिटयॉं लिखकर किताबें पत्रिकाएं मंगवाई गई, बच्‍चों को सुन्‍दर रंग भाते है सो आकर्षक पेंन्‍टस करवाया गया,अब बच्‍चों के केन्‍द्र के चित्रों में हंसते बादल और उडता कबूतर न हो तो मजा कैसे आता,सो चित्र बनवाएं गए,प्रत्‍येक रविवार बच्‍चे पढने आते,पढाते महेश भाई। इस केन्‍द्र को लेकर कितनी कल्‍पनाएं बनी,कितनी साकार हुई,कितनी भविष्‍य में साकार होगी,इसे लेकर महेश भाई को एक शिशु की भांति न जाने कितनी बार उत्‍फुलित होते देखने का मुझे सुख प्राप्‍त हुआ।   

     बाल साहित्‍य केन्‍द्र की स्‍थापना बाल साहित्‍य के लिए जिस बाल मन ने पूरी निष्‍ठा से की है,उस बाल व्‍यक्तित्‍व को इस नवनिर्मित केन्‍द्र के लिए राष्‍ट के सभी बाल साहित्‍यकारों की ओर से शुभकामनाएं ।

                           — प्रा;आशा शुक्‍ला

Published in: on at 3:10 am Comments (0)

ये हैं हिन्‍दी साहित्‍य जगत भोपाल के महानायक

latest-mp3-009.jpgअभी हाल ही में राष्‍टपति भवन में हुए एक गरिमामय समारोह में केन्‍द्रीय हिन्‍दी संस्‍थान के सम्‍मानों से हिन्‍दी की सेवा करनेवाले रचनाकारों को राष्‍टीय सम्‍मानों से नवाजा गया ।यह सम्‍मान मशहूर स़जनधर्मी सर्वश्री मंजूर एहतेशाम ,रमेशचन्‍द्र शाह तथा कमला प्रसाद को प्रदान किया गया ।

      ”  चौपाल  ” उनका हार्दिक अभिनन्‍दन करता है।

                             —- शंकर सोनाने

Published in: on December 21, 2007 at 3:58 am Comments (0)

अलंकरण समारोह तथा काशीनाथसिंह का कहानी पाठ

latest-mp3-006.jpgमध्‍य प्रदेश हिन्‍दी साहित्‍य सम्‍मेलन व्‍दारा छह साहित्‍यकारों को दिनांक 15 दिसम्‍बर 2007 को सम्‍मेलन भवन के सभागार में सम्‍मेलन के दिवंगत प्रधान मंत्री हनुमान प्रसाद तिवारी की स्‍म़ति में वर्ष 2006 के लिए अलंक़त किया गया।कथा के लिए श्री पुन्‍नीसिंह को भवभूति अलंकरण से तथा लेखिका रेखा कस्‍तवार,मुकेश वर्मा, ए असफल ,ओमप्रकाश शर्मा तथा श्री संतोष भदोरिया को वागीश्‍वरी पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया ।

     कार्यक्रम के दूसरे दिन पसिद्ध कथाकार काशीनाथ सिंह जी ने उपन्‍यास अंश का पाठ किया । अपने पाठ में उन्‍होने देह और सेक्‍स को लेकर बेबाक पाठ किया। श्रोताओं में से ओमप्रकाश शर्मा,विजयवाते तथा वन्‍दना राग ने अपने विचार प्रस्‍तुत किए।कार्यक्रम की अध्‍यक्षता प्रसिद्ध कहानीकार स्‍वयं प्रकाश ने की।उन्‍होने अपने वक्‍तव्‍य में कहा कि उन्‍होने अब तक इस प्रकार का प्रयोग नहीं किया जो उन्‍हें बहुत पहले कर  लेना चाहिए था। नए कथाकारों में इस तरह के प्रयोग अक्‍सर होते रहते हैं।यह एक बहुत अच्‍छा प्रयास हैा

Published in: on December 16, 2007 at 11:17 am Comments (1)

उर्मिला शिरिष सम्‍मानित

latest-mp3-008.jpgहमारे समय की प्रतिबद्ध रचनाकार उर्मिला शिरिष को सम्‍मानित किया गया है।उन्‍हें चौपाल की ओर से हार्दिक बधाई।

                     ‘—-शंकर सोनाने

Published in: on December 11, 2007 at 2:50 am Comments (0)

कवि त्रिलोचन का देहावसान

रविवार दिनांक 9 दिसम्‍बर 2007 को इस सदी के महान कवि ,कवि त्रिलोचन शास्‍त्री का देहावासन हो गया है।वे 91 वर्ष की आयु के थे।पिछले कई दिनों से अस्‍वस्‍थ्‍य थे।

  कवि त्रिलोचन का जाना साहित्‍य की सशक्‍त विधा कविता के एक स्‍वर्णिम युग के अवसान के समान है।असाधारण प्रतिभा के धनि और सिद्धान्‍तों पर अडिग रहनेवाले अनेक भाषाओं के महारथी साहित्‍य के इस महानायक को अबूझ नेपथ्‍य में चले जाने से साहित्‍य जगत को शोकग्रस्‍त कर दिया ।

      आलोचक और कवि रमेशचन्‍द्र शाह ने त्रिलोचन जी के अवसान को साहित्‍य की गंभीर क्षति बताया और कहा कि हिन्‍दी कविता में त्रिलोचन सानेट के एकमात्र प्रतिनिधि कवि थे।उनका इस तरह अचानक जाना बेहद दुख भरा क्षण है।जानेमाने आलोचक विजयबहादुर ने कहा कि प्रगतिशील कविता की त्रयी अब ढह गई है। इस त्रयी में नागार्जुन,केदारनाथ अग्रवाल और त्रिलोचन का नाम लिया जा सकता है।  

    कवि त्रिलोचन शास्‍त्री को ” चौपाल ” की ओर से भावभिनी श्रद्धांजलि अर्पित —- शंकर सोनाने ,सम्‍पादक,चौपाल

Published in: on December 10, 2007 at 5:22 pm Comments (0)

लेखन पार्ट टाइम हो गया है।

latest-mp3-004.jpgसाहित्‍यकारों व्‍दारा किए जा रहे आज के लेखन पर हंस के सम्‍पादक राजेन्‍द्र यादव व्‍दारा जोरदार टिप्‍पणी की गई है कि आज के लेखक का लेखन अब पार्ट टाइम हो गया है।

Published in: on at 5:12 pm Comments (0)