बाल कल्‍याण एवं बाल साहित्‍य शोध केन्‍द्र

latest-mp3-017.jpgबाल कल्‍याण एवं बाल साहित्‍य शोध केन्‍द्र

बाल मन को जीता एक छोटा बच्‍चा

संस्‍कारधानी भोपाल में बाल कल्‍याण एवं बाल साहित्‍य साहित्‍य शोध केन्‍द्र की स्‍थापना होनी ही थी।भाई महेश सक्‍सेना जिस दिन सेवा निव़त्‍त हुए,उसी दिन उनके मन के भीतर गहरे बैठा छोटा बच्‍चा इस तरह खिलखिलाकर हंसा मानो कह रहा हो- बहुत सालों बाद अब आएगा मजा।तटबंधों पर सागर की हिलोरें गहरे निशान छोड जाती है,ऐसे ही सागर की हिलोरों जैसे स्‍थायी निशान महेश भाई के बाल मन में आज तक उनकी बाल स्‍म़तियों के जीवन्‍त है।किसी बच्‍चे के रोने की आवाज जिस व्‍यक्ति की आंखें गिली और मन को विचलित करती हो,किसी बच्‍चे की कविता की एक एक पंक्ति पर जिस व्‍यक्ति का मन न्‍यौछावर हो जाता हो,किसी बिखरे को अपने माता पिता से मिलाने की श्रमसाध्‍य प्रक्रिया के बाद जो व्‍यक्ति सुकून की नींद सोता हो,जो व्‍यक्ति हर क्षण सिर्फ और सिर्फ बच्‍चों को जीता हो,उनकी खुशी में खुश,उनके दुख में दुखी हो उठता हो,वह व्‍यक्ति एक छोटा बच्‍चा ही हो सकता है।  

   एक कमरा,बाल साहित्‍य केन्‍द्र के लिए छोटा होगा,अत नीचे के घर  का एक बडा हिस्‍सा इस विशेष उददेश्‍य के लिए खाली करवाया गया,बच्‍चों को रूचि और उम्र की द़ष्टि से फरनीचर बनवाया गया,न जाने कहां कहां चिटिटयॉं लिखकर किताबें पत्रिकाएं मंगवाई गई, बच्‍चों को सुन्‍दर रंग भाते है सो आकर्षक पेंन्‍टस करवाया गया,अब बच्‍चों के केन्‍द्र के चित्रों में हंसते बादल और उडता कबूतर न हो तो मजा कैसे आता,सो चित्र बनवाएं गए,प्रत्‍येक रविवार बच्‍चे पढने आते,पढाते महेश भाई। इस केन्‍द्र को लेकर कितनी कल्‍पनाएं बनी,कितनी साकार हुई,कितनी भविष्‍य में साकार होगी,इसे लेकर महेश भाई को एक शिशु की भांति न जाने कितनी बार उत्‍फुलित होते देखने का मुझे सुख प्राप्‍त हुआ।   

     बाल साहित्‍य केन्‍द्र की स्‍थापना बाल साहित्‍य के लिए जिस बाल मन ने पूरी निष्‍ठा से की है,उस बाल व्‍यक्तित्‍व को इस नवनिर्मित केन्‍द्र के लिए राष्‍ट के सभी बाल साहित्‍यकारों की ओर से शुभकामनाएं ।

                           — प्रा;आशा शुक्‍ला

Published in: on दिसम्बर 27, 2007 at 3:10 पूर्वाह्न  टिप्पणी करे