अखिल भारतीय और प्रादेशिक पुरस्‍कारों की घोषणा

मध्‍यप्रदेश संस्‍क़ृति परिषद के अंतर्गत संचालित साहित्‍य अकादमी ने सन 2003 से 2005 के पांच अखिल भारतीय और 10 प्रादेशिक पुरस्‍कारों की घोषणा की है।यह पुरस्‍कार साहित्‍य के क्षेत्र में निबंध,कहानी,कविता,आलोचना,उपन्‍यास और श्रेष्‍ठ लेखन के पं माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्‍कार,निबंध डा पुष्‍पारानी गर्ग को उनकी कृति  शिल्‍पी में जल,गजानन  माधव मु‍क्तिबोध पुरस्‍कार,कहानी डा सत्‍येन कुमार को  ”तेदुआ’, वीरसिंह देव पुरस्‍कार ,उपन्‍यास पर मिथिलेश्‍वर को उनकी क़ृति ‘सुरंग में सुबह ”,आचार्य रामचंद शुक्‍ल पुरस्‍कार,आलोचना में डा संतोष कुमार तिवारी को उनकी कृति ‘ अज्ञेय से अरूण कमल’, औ पं भवानी प्रसार मिश्र पुरस्‍कार कविता के लिए बलवीरसिंह करूण को उनकी कविता ‘ मैं द्रोणाचार्य बोलता हूँ” पर दिया जाएगा।पुरस्‍कार स्‍वरूप 25हजार रूपए की राशि प्रदान की जाएगी।

प्रादेशिक पुरस्‍कारों में–

पं बालकृष्‍ण शर्मा नवीन पुरस्‍कार उपन्‍यास में निर्मला भुराडिया को उनकी कृति ” ऑब्‍जेक्‍शन मी लार्ड’,सुभद्रा कुमारी चौहान पुरस्‍कार कहानी ‘मनोहर  काजल’,श्रीकृष्‍ण सरल पुरस्‍कार कविता डा कृष्‍ण गोपाल मिश्र, आचार्य नंददुलारे बावपेयी पुरस्‍कार आलोचना में डा श्‍यामसुन्‍दर दुबे,हरिकृष्‍ण प्रेमी पुरस्‍कार नाटक एकांकी में डा सुरेश शुक्‍ल चंद,शरद जोशी पुरस्‍कार व्‍यंग्‍य ललित निबंध आत्‍मकंथा संस्‍करण में प्रताप राव कदम को दिया गया है। दुष्‍यन्‍त कुमार पुरस्‍कार प्रदेश के लेखक की प्रथम कृति श्री राम  मिश्र को ,ईसुरी पुरस्‍कार   डा धर्मेन्‍द्र पारे को,जहूरबख्‍श पुरस्‍कार बाल साहित्‍य में डा रामवल्‍लभ आचार्य को और तांबे पुरस्‍कार डा अनिल गजभिए को दिया जाएगा। प्रत्‍येक पुरस्‍कृत लेखक को 21 हजार की राशि प्रदान की जाएगी। 

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Published in: on जनवरी 11, 2008 at 5:18 अपराह्न  टिप्पणी करे  

हिन्‍दी खुलेपन और स्‍वतंत्रता की भाषा- पंत

हिन्‍दी खुलेपन और स्‍वतंत्रता की भाष है,यह विचार गुरूवार दिनांक- 10 जनवरी 2008 को विश्‍व हिन्‍दी दिवस के उपलक्ष्‍य हिन्‍दी विषय पर आयोजित विशेष संगोष्‍ठी के अवसर पर प्रसिद्ध साहित्‍यकार कैलाशचन्‍द्र पंत ने व्‍यक्‍त किए।इस अवसर पर भगवत रावत,राजश्री रावत और अन्‍य साहित्‍यकार उपस्थित थे।श्री पंत ने कहा कि विज्ञापन तो हिन्‍दी में बडे बडे अक्षरों में लिखे जाते हैं,जबकि उन पर चेतावनी अत्‍यन्‍त छोटे अक्षरों में अंग्रेजी में लिखी जाती है,जिससे यह स्‍पष्‍ट होता है कि हिन्‍दी स्‍वतंत्रता और खुलेपन की भाषा है,वहीं अंग्रेजी छिपाव भी भाषा है। भगवत रावत ने कहा कि हिन्‍दी नदी के समान प्रवाहमान भाषा है जो  उपर से नीचे की ओर प्रवाहित होती है  और प्रवाह क्रम में जो भी मिले उसे साथ ले चलती है।

Published in: on जनवरी 11, 2008 at 4:48 अपराह्न  टिप्पणी करे