शायर डा युनूस फरहत

                                                                                            -. सलीम कुरैशी

  डा युनूस फरहत का जन्म 26 मई 1947 को भोपाल में हुआ है । फरहत साहब ने उस वक्त शेर कहा था जब वे कक्षा चार में पढ़ते थे । उनकी पहली रचना 1958 में बीसवीं सदी में प्रकाशित हुई थी । एक तरफ से यह फ़ितरी शायर है  डा युनूस फरहत शायरी की लगभग सभी विधा में पारंगत है । विशेष रूप से यह नज्मों के शायर है । शायरी के साथ साथ फरहत साहब ने पत्रकारिता भी की है । सन 1960 मे महानामा कायनातनिकाला जिसके संपादd रहें मेचलेस विकली के भी संपादक रहे हैं इसके अतिरिक्त भोपाल से निकलने वाले अखबार दैनिक अफकारएआफताब जदीद,भोपाल टाइम्स,रफ्तार आदि मे भी काम किया है।

    अभी तक आपके तीन शेरी मजमूएं प्रकाशित हो चके हैं यथा,1.शकिस्ते ख्वाब,2. विजदान, 3. चिराग ए आरजू । देश व प्रदेश की कई सस्थाओं व्दारा आपको सम्मानित भी किया गया है। मप्र उर्दू अकादमी व्दारा भी सूबाई पुरस्कार दfया गया है । आपके एक सम्मान के अवसर पर साप्ताहिक सुखद भारत व्दारा विशेषांक भी प्रकाशित किया गया । इसकs अतिरिक्त दैनिक अफकार और महानामा महफिल ए सनम ने भी विशेषांक प्रकाशित किए हैं । दैनिक अफकार  में फरहत साहब की शायरी एवं शख्सियत पर जिन शायरों व लेखकोa s मजामित आदि लिखे है उनमे कैफ भोपाली, इमराज अंसारी,शकीला बानों भोपाली,मुस्तफा ताजइशरत कादरी,रज़ा रामपुरी,एम ए शाद,रहबर जौनपुरी,अब्इुल रज्जाक एशी,तहमीना शिराजी आदि सम्मलित है।

     मशहूर शायर कैफ भोपाली लिखते हैं युनूस फरहत ने जिस बर्क रफ्तारी से तरक्की की है और अपने को एक चाबुकदस्त शहसवार मनवा लिया है वो हर तरह मेरे लिए बाईसे मुसर्रत है । डा मलिकजादा मंजूर चिराग ए आरजू में तहरीर करते हैं । मजमुई तौी पर युनूस फरहत मोहब्बत की सरशारियों और जिन्दगी की नाहमवारियों के शायर है ।श्री इकबाल मसूद के विचार है कि युनूस फरहत बुनियादी तौर पर नज्म के शायर है मगर अकलीमें सुखन की तमाम इस्नाद पर दस्त रस रखते हैं ।श्री इशरत कादती लिखते हैं । हरचंद के युनूस पाबन्द नज्मों की तरफ ज्यादा रागीब हैं । लेकिन उसकी गज़लों का आहंग और लहजा भी गैर मानूस नहीं है । और उसने अपने शेरी सफर में जितनी गज़लें कहीं है उनमें भी क्लासिकी तरक्की पसन्दी और नये लेहजे की बाजेगश्त सुनाई देती है ।

   डा युनूस फरहत की शायरी के कुछ नमूने पेशे खिदमत है —.

 

      जारी है अब भी अपनी शहादत के सिलसिले ।

      रन में नहीं हुसैन मगर करबला है ।।

     शिकवा उनसे रूबरू करना है आज ।

     खूबसूरत गुफ्तगू करना है आज ।।

     कुछ इस अदा से मिजाने बहार बदला है।

     चमन में रहते हुए भी खुशी नहीं होती ।।

     मुख्तलिफ नामों से करते हैं तुझे याद सभी ।

     देर लिखता है कोई ,कोई हरम लिखता है।।

     इलाही फिर हुए रावन फसाद आमादा ।

     हमारे हिन्द में फिर कोई राम पैदा कर ।।

     यह मेरी वफाओं का हुनर कैसा लगेगा ।

    हाथों में तेरे खून ए जिगर कैसा लगेगा ।।

   हमें जिस तरह है हवा की जरूरत ।

   इसी तरह है एकता की जरूरत ।।

न नूर ए सुबह मनासिब, न चांदनी ज़ैबा ।

कहां से लाईये तशवीह उस बदन के लिए ।।

जब कभी इश्क की तारीख पढ़ोगे यारों ।

जा बजा देखना फरहत के हवाले होंगे ।।

डा युनूस फरहत

34 मटिया महल,पैराडाईज कार्नर,बिहाइन्ड जीपीओ

नूरमहल रोड़,भोपाल मप्रमोबाइल  9893477378

फोटो एलबम  के लिए नीचे दिए पते पर क्लिक करें  http://drshankarsonane.picsquare.com/album/Default%20Album            

Published in: on मई 22, 2008 at 10:23 पूर्वाह्न  Comments (1)  

The URI to TrackBack this entry is: https://choupal.wordpress.com/2008/05/22/%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%b0-%e0%a4%a1%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a5%82%e0%a4%b8-%e0%a4%ab%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%a4/trackback/

RSS feed for comments on this post.

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: