.अदबी कहकशां के मुशायरे में साहित्यकारों एवं समाज सेवियों का सम्मान

 

अदबी कहकशां के मुशायरे में साहित्यकारों एवं समाज सेवियों का सम्मान

भोपाल साहित्यिक संस्था अदबी कहकशां के तत्वाधान में दिनांकः 16 अगस्त 2008 को सम्मान और मुशायरे का आयोजन किया गया स्थानीय शकीला बानो भोपाली कम्युनिटी हाल,फतहगढ़,भोपाल में मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड के नवनियुक्त अध्यक्ष श्री गुफरान आज़म कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे अध्यक्षता उर्दू के प्रख्यात शायर नसीर परवाज ने की मुख्य अतिथि के रूप में गुफरान आज़म का नगर की साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं व्दारा भावभीना अभिनंदन और स्वागत किया गया इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मैं वक्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष पद पर रहते हुए किसी भी प्रभावशाली और गलत व्यक्ति को फायदा नहीं दूंगा और न ही स्वयं ही फायदा लूंगा बल्कि पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथा वक्फ़ बोर्ड के माध्यम से कौम और मुल्क की सेवा करूंगा । श्री आजम ने कहा कि मैं ईमानदारी से काम करनेवालों का साथी हूं। लोगों को सोचना होगा कि व्यक्ति बड़ा है या अल्लाह बड़ा है,लोग अगर अल्लाह की बड़ाई तस्लीम करते हैं तो वक्फबोर्ड की संपति की सबको मिलकर रक्षा करनी होगी।

    इस अवसर पर साहित्यिक संस्थाओं ने गुफराने आजम का अभिनंदन व सम्मान किया उनमें सलीम कुरैशी,सनतउल्लाह सिद्धीकी,मोहम्मद माहिर,डा युनूस फरहत,इकबाद बैदार,डा अली अब्बास उम्मीद,अहद प्रकाश,इलियास इस्माईल,शाहनवाज़ खान और मोहम्मद परवेज सम्मिलत है। इन वक्ताओं ने वक्फ़बोर्ड को बेहतर बनाने के संबंध में अपने विचार प्रकट किये तत्पश्चात शायरों,समाजसेवकों और पत्रकारों का सम्मान किया गया जिसमें मंजर भोपाली,शाहिद मीर,वफा सिद्धीकी,यूनुस फरहत,जावेद गौंडवी,अशफाक उल्लाह खां एवं इकराम सिद्धीकी उल्लेखनीय है।सम्मान समारोह के बाद मुशायरें का आयोजन किया गया जिनमें नगर के शायरों ने अपनी खूबसूरत ग़ज़लों से खूबवाहवाही लूटी । पेश है चन्द अशआरात् –.

    ज़रा सा वक्त गुज़र जाए गफलतों में  अगर

     तो अच्छे अच्छों को हाथ मलना पड़ता है।

                         -. मंजर भोपाली

   वे लोग वफ़ा साथ कभी दे नहीं सकते

   गिरना जिन्हें आता है संभलना नहीं आता ।।

                    –.वफ़ा सिद्धीकी

 आज कल बेटी का ससुराल से मैके आना

   जैसे एक क़ैदी को पैरोल  दिया जाता है।

                — विजय तिवारी

परिन्दा  आन कर भोपाल से वापिस नहीं जाता

खुले आकाश से यह खूबसूरत जाल अच्छा है।

                      -.शाहिद मीर

जारी है अब भी अपनी शहादत के सिलिसले

रन में नहीं हुसैन मगर करबला तो है।

                 -. यूनुl फ़रहत

 किससे पूछूं कोई ताबीर बताता ही नहीं

 कल मैंने ख्वाब में अपना ही सरापा देखा।

                    -. अहमद उद्दीन अशरफ़

मुशायरे में सर्वश्री नसीर परवाज़,अली अब्बास उम्मीद,खलील कुरैशी,मसूद रज़ा,जावेद गोंडवी,ताजउद्दीन ताज,सीमा नाज़,काजी मलिक नवेद,बशर सहबाई,बेबाक भोपाली,इकराम अकरम,काजिम रज़ा राही,इकबाल बैदार,हसीब तरन्नुम,कामिल बहज़ादी,रफीक बेकस,पुरनम परनवी,शाकिर जामी,मंजूर अहमद नज़र, जिया फारूकी,महबूब एहमद महबूब,सलीम दानिश,मुजफ्फर तालिब,गोपाल नीरद और   अहद प्रकाश ने शिरकत की । मुशायरे का संचालन डा अली अब्बास उम्मीद ने किया ।आभार प्रदर्शन संस्था के सचिव, सलीम कुरैशी ने किया ।

                                                 सलीम कुरैशी

                                              सचिव,अदबी कहकशां

Published in: on अगस्त 19, 2008 at 4:16 अपराह्न  टिप्पणी करे  

यह कैसी आज़ादी

कृष्णशंकर सोनाने

भारत की 61 वीं आजादी के वर्षगांठ पर

यह कैसी आज़ादी जिसमें…..

0 पुलिस और न्यायाधीश कानून की मनमानी व्याख्या कर कानून का दुरूपयोग करते हैं।

0 रक्षक ही भक्षक बन गए हैं।

0 निरापराधियों को अपराधी सिद्ध किया जाता है।

0 अंग्रेजों व्दारा बनायी गई भारतीय दण्ड संहिता 1860 भारतियों पर अब भी थोपी जा रही है।

0 गोरे अंग्रेज भारत छोड़कर चले गए किन्तु काले अंग्रेज भारतियों पर शासन कर रहे हैं।

0 भ्रष्टाचार,लूटमार और  आतंक के बादल सदैव मंडराते रहते है।

0 अब भी कमजोर नागरिकों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है।

0 मक्कार सिंहासन पर आसीन है और सज्जनों की दुर्गति हो रही है।

Published in: on अगस्त 15, 2008 at 4:03 पूर्वाह्न  टिप्पणी करे